देश का सबसे अधिक एफडीआई प्राप्त करने वाला राज्य बना गुजरात

 


by Nitin Singhal

वित्तीय वर्ष 2020-21 में गुजरात ने 1,62,830 करोड़ रूपये की एफडीआई प्राप्त की है। यह लक्ष्य कोविड़ महामारी के समय प्राप्त करना गुजरात राज्य की एक बड़ी सफलता  है। यह भारत को प्राप्त कुल एफडीआई का 37 प्रतिशत है जो कि एक बड़ी संख्या है। गुजरात हमेशा से ही बाहरी निवेशकों के लिए एक पसंदीदा जगह रहा है। गुजरात में निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बहुत से कार्य किये गये है। निवेशकों को बहुत सी सुविधाएँ दी जाती है जिससे निवेशक इस राज्य में निवेश करना बेहतर समझते हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आसान ऋण सुविधा, जमीन अधिग्रहण में मदद, प्रौजक्ट के मंजूरी में कम समय, भष्ट्राचार पर नियंत्रण साथ ही अन्य उपाय भी किये गये है। आधारभूत संरचना का भी विकास किया गया है ताकि उद्योगों को परिवहन, बिजली आदि को प्राप्त करने में समस्या न उठानी पड़े। व्यापार को सरल बनाने के लिए कई नियमों  में ढील दी गई है साथ ही कई नियम बनाये गये है। गुजरात राज्य को व्यापार, निवेश का एक बेहतर स्थल बनाने के लिए हमेशा प्रयास किये जाते हैं। 




गुजरात में पिछले वर्ष 42,976 करोड़ रूपये का एफडीआई आया था। इस वर्ष यह 279 प्रतिशत बढ़ा है। भारत में भी एफडीआई में इस वर्ष बढ़ोत्तरी हुई है। यह 25 प्रतिशत बढ़ी है। गुजरात को सबसे अधिक एफडीआई कंम्पयूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से प्राप्त हुई है। गुजरात ने एक चीज़ में विशेष सफलता प्राप्त की है वह है फेसलैस ऑनलाइन डेवलपमेंट प्लान अनुमोदन प्रणाली 2.0 प्रारम्भ करना। ऐसा करने वाला गुजरात देश का प्रथम राज्य है। नये छोटे उद्योगों एमएसएमई को गुजरात राज्य में 3 वर्ष तक राज्य से किसी भी प्रकार का कोई अनुमोदन लेने की जरूरत नहीं है। 

भारत जैसे राज्य के लिए एफडीआई एक बेहद आवश्यक वित्तीय निवेश है। इससे देश में रोज़गार बड़ी संख्या में पैदा होता है। बेहतर तकनीकी एवं कार्यशैली का विकास होता है। प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी होने से तकनीकी एवं मानवीय विकास होता है। गुजरात राज्य हमेशा से ही एस एफडीआई को प्राप्त करने में आगे रहा है। आज हमें जरूरत है कि हम ऐसे राज्यों में भी जहाँ पर कम एफडीआई प्राप्त होती है एफडीआई बढ़ाने का प्रयास करें। इसके लिए हमें कानून, सुरक्षा, परिवहन, बिजली पूर्ति को बढाना होगा साथ ही भष्ट्राचार, सरकारी देरी, आदि पर नियंत्रण लगाना होगा। उद्योगों को कई तरह की छूटें और सहायता देनाी होगी। भूमि अधिग्रहण करने में उद्योगों का सहयोग करना  होगा। उद्योगों का क्लस्टर विकसित करने पर जोर देना होगा। उद्योगों के आसपास बाज़ार को विकसित  करने पर भी बल देना होगा। उद्योगों को सुरक्षा देनी होगी ताकि वह निड़र होकर देश के पिछड़े क्षेत्रों में निवेश करने को लेकर प्रेरित हो।


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Comments

  1. बहुत अच्छा लगा सर ये ब्लॉग,ऐसे ही आर्थिक जगत से जुड़े विषयो पर ब्लॉग बनाते रहियेगा सर।thank you

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