एस जयशंकर की टिप्पणी से बौखलाया चीन।
by Nitin Singhal
भारत चीन विवाद पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है-
भारत एंव चीन के बीच लंबे समय से चल रहा सीमा विवाद लगातार उलझता ही जा रहा है। चीन के साथ भारत के सीमा विवाद के कई मुद्दे है। चीन एवं भारत के बीच हमेशा से ही सीमा को लेकर विवाद रहा है। चीन भारत के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है। इस दावे में अरूणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा आता है जिसे चीन अपना बताता है। लंबे समय से चीन की सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ करती रही हैं। इसके कारण कई बार भारत एवं चीन के बीच तनाव उत्पन्न हो चुका है। कई स्थानों पर तो भारतीय एवं चीन की सेना के बीच झड़प भी हुई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर इकनॉमिक फोरम में बताया है कि मुख्य तौर पर भारत एवं चीन के बीच वास्तविक सीमा नियंत्रण रेखा को लेकर तनाव के दो महत्वपूर्ण बिंदु है-
1. चीन की सेना और भारत की सेना कई स्थानों पर ठीक एक दूसरे के सामने तैनात है। इससे सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया है।
2. चीन जिस तरह से अपनी सेना की संख्या को भारत-चीन वास्तविक सीमा नियंत्रण रेखा पर लगातार बढ़ाता जा रहा हैं, उससे यह तनाव उत्पन्न हो गया है कि क्या वास्तव में चीन लिखित रूप से दिये गये अपने वादे पर कायम रहेगा, जिसमें उसने कहा था कि वह वास्तविक सीमा नियंत्रण पर बड़ी संख्या में अपनी सेना तैनात नहीं करेगा।
चीन का कहना है कि वह कोई अतिरिक्त सेना सीमा पर नहीं भेज रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से जितनी सेना की जरूरत है उतनी ही सेना भारत-चीन सीमा पर तैनात है। सेना की उतनी संख्या को वहाँ पर रखा गया है जिससे कि यदि सेना को कभी जवाबी कार्यवाही की जरूरत पड़े तो वह कर सकें। इस प्रकार चीन का साफ कहना है कि प्रतिरक्षा के लिए जितनी सेना की आवश्यकता है उतनी ही सेना उसने सीमा पर रखी हुई है।
भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच 1993 एवं 1996 में वास्तविक सीमा नियंत्रण रेखा को लेकर जो समझौता हुआ था चीन को उसका पालन करना चाहिए परंतु चीन लगातार उन समझौतों का उल्लंघन कर रहा है।
भारत चीन के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। चीन लंबे समय से भारत की सीमा में घुसपैठ कर रहा है और भारतीय भूमि को हड़पने में लगा है। इन तनावों के कारण दोनों देशों के बीच सीमा विवाद में कोई समझौता हो नहीं पा रहा है और अगर कोई समझौता हो भी रहा है तो उस समझौते का पालन नहीं हो पा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की कई बातचीत के दौर गुज़र चुके हैं परंतु समस्या का कोई समाधान होते नहीं दिख रहा है। अभी भी लद्दाख के डेमचोक, डेपसांग, गोगरा आदि स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रहा ताजा विवाद मई 2020 को शुरू हुआ। एक मई को लद्दाख के पैगोन्ग त्यो झील के पास दोनों देशों की सेना के जवानों के बीच हाथापाई हुई। इसमें दोनों देशों के कई सैनिक घायल हुए। यहाँ से विवाद बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि 15 जून को गलवान घाटी में हुए सैनिक संघर्ष में दोनों देशों के कई सैनिकों की मौत हो गई। इस घटना से दोनों देशों के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया और कुछ समय तक तो युद्ध तक के हालात पैदा हो गये थे। इस घटना के बाद दोनों देशों ने बातचीत के एक नये दौर को शुरू करने का प्रयास किया।
द हिन्दू अखबार में एक रिपार्ट छपी है जिसके अनुसार चीन पूर्वी लद्दाख में एक नया सैन्य ठिकाना बनाने का प्रयास कर रहा है। वहाँ वह पहाड़ों पर चढ़ने में माहिर तिब्बती युवाओँ को प्रशिक्षण दे रहा हैं। जिन इलाकों में यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है वह ऐसे क्षेत्रों में पड़ता है जहाँ भारत-चीन का सीमा विवाद चल रहा है। मिमांग चेतोन नाम के इस नये सैन्य अड्डे पर प्रशिक्षण कार्य दिया जा रहा है।
जिस तरह चीन भूटान एवं सिक्किम के पास नये सैन्य अड्डे बना रहा है और उन स्थानों पर लगातार अनाधिकृत प्रवेश कर रहा है जहाँ भारतीय सीमा है ,इससे भारत का 'चिकन नैक' कहे जाने वाले क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ रही हैं। भूटान की सीमा पर चीन जिस तरह से लगातार अनाधिकृत बसावत कर रहा है वह भारतीय सीमा सुरक्षा की दृष्टि से खतरे का विषय है।
अभी भी सीमा समस्या पर भारत-चीन के बीच बातचीत जारी है पंरतु विदेश मंत्रालय का कहना है कि अभी बातचीत को सफल होने में समय लगेगा। इसका मतलब यह हुआ की अभी भी चीन की सेना विवादित स्थानों पर बनी रहेगी और भारत-चीन सीमा विवाद ऐसे ही चलता रहेगा।
बातचीत का सबसे अहम बिंदू यही है कि दोनों सेनाएं जो सीमा पर आमने-सामने खड़ी है वह धीरे-धीरे करके पीछे हट जाए। परंतु कोई सहमति न हो सकने के चलते अभी भी दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी है। हालाँकि दोनों देशों में इस बात पर फरवरी में सहमति हुई थी कि एक चरणबद्ध तरीके से सेनाएँ पीछे हटेगी।
सितंबर 2020 में भारत एवं चीन के विदेश मंत्रियों के बीच इस विषय को लेकर बातचीत भी हुई। इस बातचीत में सहमति बनी की दोनों देशों के बीच तनाव को कम किया जाएगा। सेना को धीरे-धीरे पीछे हटाया जाएगा। सीमा से जुड़ी सभी प्रोटोकॉल का पालन किये जाने की पूरी कोशिश की जाएगी। परंतु वास्तविक धरातल पर यह सहमति होते नहीं दिख रही है। भारत-चीन के बीच तनाव समय के साथ कम नहीं हो रहा हैं ऐसे में यह प्रश्न उठने लगा है कि क्या बातचीत ही भारत-चीन सीमा विवाद समाप्त करने का एकमात्रा रास्ता है?

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