कोरोना से हमने क्या सीखा?
कोरोना से हमने क्या सीखा?
by Nitin Singhal
कोरोना अगर हम कहें तो तीसरा विश्व युद्ध ही है। जिस तरह यह हर देश को तबाह कर रहा है उससे यही समझ आता है कि इंसान की महत्वकांक्षा ही इंसान को एक दिन समाप्त कर देगी। हम प्रकृति में लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं। हम यह नहीं सोच रहे हैं कि इससे उत्पन्न होने वाले दुष्परिणामों को हम क्या झेल पाने में सक्षम है। जिस समय लैब के अंदर कोरोना वायरस को लगातार विभिन्न एक्सपैरिमेंट के जरिये मजबूत बनाया जा रहा था उस समय इंसान ने यदि सोच लिया होता कि यदि यह वायरस फैलता है तो क्या हम इसे प्रबंधित कर पाएँगें परंतु दुर्भाग्यवश मनुष्य ने ऐसा नहीं सोचा। इसकता दुष्प्रभाव यह रहा कि लाखों लोग इस वायरस से मारे गये। करोड़ों लोग इस वायरस का शिकार बने। विश्व की अर्थवयवस्था 7 से 8 साल पीछे चली गयी। करोड़ों लोग बेरोजगार हो गये। पूरे विश्व में एक आतंक का माहौल बन गया। अवसाद की समस्या घर- घर की समस्या बन गई।
हमें आज अपने हर कर्म को करने के पीछे यही सोच रखनी होगी की यदि हालात बिगड़ते है तो क्या हम इतने सक्षम है कि उन हालातों को प्रबंधित कर सकें यदि हम ऐसा कर सकते हैं तो हमें जरूर वह कार्य करना चाहिए अन्यथा बिना कोई अंहकार पाले उस कार्य से पीछे हट जाना चाहिए। आज हम वैज्ञानिक उन्नति की जिस रफ़्तार में हैं उसमें यदि हम नहीं रूके तो आगे चलकर हम ऐसे वायरस भी पैदा कर सकेंगे जो यदि शरीर में आ जाए तो बिना जान लिया शरीर न छोड़े तब दुनिया में मौतों का आँकड़ा लाखों में नहीं करोड़ों में होगा। हमें यह समझना होगा कि ज्ञान के जिस विस्तार को हम लगातार बढ़ाते जा रहे हैं उसकी हद क्या है। यदि हमने अपनी हदों को नहीं समझा तो फिर प्रकृति की कोई हद नहीं है।
एक बात मनुष्य को ध्यान में रखनी चाहिए कि हमें जिंदा रहने के लिए प्रकृति की ज़रूरत है ना कि प्रकृति को हमारी ज़रूरत है। यदि इस पृथ्वी से जीवन समाप्त भी हो जाए तो प्रकृति बनी रहेगी हा होगा यह कि मनुष्य की जगह कोई ओर जीव आ जाएगा। ऐसे में मनुष्य को अंहकार का परित्याग करके प्रकृति के साथ सामंजस्य मिलाकर चलने की कोशिश करनी चाहिए और प्रकृति के नियमों में तभी दखल देना चाहिए जब इंसान यह पूर्ण रूप से सुनिश्चित कर ले कि इस दखल से यदि कुछ गड़बड़ होती है तो वह उस गडबड़ को हर हाल में प्रबंधित कर लेगा।
Yes
ReplyDeletePls be safe....
ReplyDeleteMein apse pure tarah sahmat hoon Nitin ji.
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