21 जून की कुछ खास बातें जो शायद बहुत कम लोगों को पता होंगी।
भारत में साल का सबसे लंबा दिन होता है 21 जून, जाने क्यों?
by Nitin Singhal
सूर्य के चक्कर लगाती पृथ्वी ( फ़ोटो क्रेडिट - dreamstime.com)
भारत में हर वर्ष 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है। इस दिन सूर्य की किरणें हमारे देश पर सबसे लंबे समय तक रहती है। इस घटना को अंग्रेजी भाषा में समर सौल्स्टिस कहा जाता है। 21 जून ही सबसे लंबा दिन क्यों होता है इसके पीछे कई कारण हैंं।
पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ घूमती है। पृथ्वी को सूर्य के चारों तरफ एक चक्कर को पूरा करने में एक वर्ष का समय लगता है। इस पूरे क्रम में पृथ्वी पर सूर्य की पड़ने वाली किरणों के कोणों में लगातार परिवर्तन होता रहता है। इस परिवर्तन का कारण बनता है पृथ्वी का अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री. झुका होना। पृथ्वी इस झुकाव के साथ जब सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाती है तो पृथ्वी पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों के कोण में परिवर्तन होता रहता है। पृथ्वी के इस झुकाव के कारण सूर्य की किरणें एक गोलार्द्ध पर अधिक दूरी तक पड़ती है वही दूसरे गोलार्द्ध पर कम दूरी तक। इसके बाद जब पृथ्वी वहाँ से आगे बढ़ जाती है तो आधा रास्ता पूरा करने पर सूर्य की किरणों का कोण बदल जाता है और अब पृथ्वी के दूसरे गोलार्द्ध पर ज्यादा दूरी तक सूर्य की किरणें पड़ती है वह पहले गोलार्द्ध पर कम दूरी तक।
उत्तरी गोलार्द्ध पर अधिक दूरी तक पड़ती सूर्य की किरणें (फ़ोटो क्रेडिट- dreamstime.com)
21 जून को सूर्य की किरणे उत्तरी गोलार्द्ध पर अधिक दूरी तक पड़ती है। जिस वजह से सूर्य की किरणों का कोण अधिक हो जाता है या बढ़ जाता है। इससे सूर्य की किरणें एक स्थान पर अधिक समय तक रहती है। 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी चमकती है इस वजह से यह सबसे बड़ा दिन बन जाता है इसके बाद सूर्य की किरणें का कोण बढ़ना रूक जाता है और वापस से कम होने लगता है और 6 महिनों के बाद सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधी पड़ती है उस समय दक्षिण गोलार्द्ध पर सूर्य की किरणें बेहद टेढ़ी पड़ती है। भारत में 13 घंटे और 12 मिनट का दिन 21 जून को रहा।
दिन का समय उत्तरी गोलार्द्ध में हर जगह अलग-अलग होता है। भारत में जहाँ 13 घंटे के आसपास रहता है वही फिनलैंडस, नार्वे, ग्रीनलैंड आदि क्षेत्रों में तो मध्य रात्रि तक दिन बना रहता है। इस समय पृथ्वी के उत्तरतम बिंदू पर 24 घंटे तक दिन बना रहता है यह स्थिति वहाँ पर 6 माह तक लगातार चलती रहती है यानि 6 माह का दिन वहाँ पर होता है और उसके बाद 6 माह की रात्रि।
21 जून के बाद बदलने लगता है मौसम
21 जून के बाद मौसम में बदलाव आने लगता है। 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी चमकती है और इसके बाद सूर्य की किरणें वापस विषुवत रेखा की ओर लंबवत होना शुरू हो जाती है। यानी यदि हम कहें कि इसके बाद उत्तरी गोलार्द्ध में गर्मी का समय जाने लगता है तो यह सही होगा। जैसे ही सूर्य की लंबवत किरणें विषुवत रेखा को पार कर मकर रेखा की ओर जाने लगेगी तो उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी का समय शुरू हो जाएगा। यही कारण है कि जिस समय भारत, यूरोप में गर्मी हो रही होता है तो उसी समय आस्ट्रियाँ में सर्दी पड़ रही होती है और जिस समय आस्ट्रियाँ में गर्मी पड़ रही होती है उसी समय भारत एवं यूरोप में ठंड़ पड़ रही होती है।


Thanks
ReplyDeletevery knowledgable,its knowing to everyone about 21 june...thank you
ReplyDeleteThanks 🙂🙂
DeleteWonderful
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